NTA UGC NET PAPER 1 IMPORTANT QUESTIONS

https://youtu.be/HaFfqCHHYTM

Sunday, 29 March 2020

दिहाड़ी मजदूरों की मुसीबत lockdown

बहुत जरूरी

 PROBLEMS IN LOCKDOWN

  • Since Delhi announced a lockdown on Monday, followed by a nationwide lockdown announced by Prime Minister Narendra Modi on Tuesday, hundreds of migrant labourers have— in the absence of public transport and with borders sealed— decided to walk home to escape hunger, insecurity.
  • “We have no income anymore. We would earn Rs 200-250 daily. Since the gradual shutting down of the city, work has come to a standstill. I was not earning but the landlord kept asking for rent,” he said. With no food, water or money, the group left. At Anand Vihar, they drank from a canal. “All shops are closed. We can’t even buy water if we want,”.

PROBLEMS IN LOCKDOWN

  • There has been a mass exodus of labourers from the site ever since the government announced a lockdown, Several daily wagers live in shared rooms and pay rents to the tune of Rs 500 per month for these crowded accommodations.
  • The Delhi government has started giving food to those in need at night shelters twice a day. While the number of people eating there has increased, those who left the city said they did not know about the option.
  • Some men took loans of a few hundred rupees before heading East.

DELHI

  • Day-time occupancy at shelters for the homeless has increased by 2.5 times in the past three days. With the capital under lockdown since Monday, the number of people staying in the shelters has gone up, with officials saying even at night, 1,000-1,500 people are staying there now.
  • On Saturday, 2,805 people stayed at the shelter. This number rose to 6,846 on Monday, the day the lockdown came into force. The number of those staying the night increased from 7,200 to 8,700.

DELHI

  • The Delhi government has been distributing food in several shelters over the past two days. It is also considering financial aid for those living in shelters.
  • Labourers, rickshaw pullers, street vendors, sanitation workers and daily-wage labourers, who have been rendered vulnerable and bereft of income and food amid the lockdown, said they are unsure of what to do next. Factories and construction sites are closed, and interstate train and transport services are suspended at least until March 31.

 DELHI

  • For the time being, night shelters run by the Delhi Urban Shelter Improvement Board (DUSIB) are proving to be cold comfort at an uncertain time.
  • DUSIB member Bipin Rai told The Indian Express, “We have been providing lunch and dinner at 220 shelters since March 23. The people, even if they are not living in shelters, can choose from a simple menu of rice, pulses, vegetables, sometimes even khichdi.”

बिजली का बिल और कोरोना

  • https://zee.gl/uf0LpWzयूपी में अप्रैल के बिजली बिल को लेकर विभाग से जारी हुआ आदेश
  • बिजली बिल पिछले तीन महीनों के औसत के आधार पर लिया जाएगा

कोरोना से बढ़ते खौफ के बीच सरकारें लोगों को राहत देने की तमाम कोशिशें कर रही हैं. एक ओर जहां यूपी के गौतमबुद्ध नगर में जिलाधिकारी ने आदेश निकाला था कि इस महीने किरायेदारों से मकान मालिक किराया ना वसूलें वहीं दूसरी ओर अब नई खबर आ रही है कि यूपी के बिजली विभाग ने तय किया है कि अप्रैल महीने में बिजली का बिल उपभोक्ता के तीन महीने की बिजली खपत के औसत के आधार पर लिया जाएगा.

आपको बता दें कि यूपी में बिजली विभाग मीटिर रीडिंग के आधार पर बिजली का बिल तैयार करता है और रीडिंग के लिए एजेंट डोर-टू-डोर जाते हैं. लेकिन कोरोना वायरस को रोकने के लिए लगाए गए लॉकडाउन की वजह से किसी का घर से बाहर निकलना मुश्किल हो चुका है.

बिजली विभाग का नया आदेश

इसके अलावा मीटर रीडिंग के लिए घर-घर जाने पर उन एजेंटों को कोरोना से संक्रमित होने का खतरा होगा वो अलग. यही वजह है कि बिजली विभाग ने तय किया है कि अप्रैल महीने का बिजली का बिल तीन महीने के औसत के आधार पर लिया जाएगा.

दिल्ली टू up

दिल्ली की सीमा पर मौजूद उत्तर प्रदेश के कौशांबी बस स्टेशन पर शनिवार को इतनी भीड़ जुटी की संभालने के लिए गाजियाबाद के डीएम, एसएसपी सहित आधे दर्जन से अधिक अफसरों को घंटों कैंप करना पड़ा। जब भीड़ को संभालना मुश्किल था, तब लखनऊ में बैठे उत्तरप्रदेश के एक आईएएस अफसर ने अपने मैनेजमेंट का लोहा मनवाया।

आईएएस अफसरों की प्रबंधन क्षमता कई बार मुसीबत के समय सरकारों के लिए संकटमोचक बन जाती है। उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार के लिए 2004 बैच के तेजतरार्र आईएएस अफसर राजशेखर कुछ ऐसे ही संकट मोचक साबित हुए। दिल्ली से आकर गाजियाबाद में फंसे हजारों मजदूर अगर शनिवार को घरों के लिए रवाना हो सके, तो इसके पीछे राजशेखर का कुशल प्रबंधन रहा। राजशेखर के मैनेजमेंट का लोहा, गाजियाबाद के जिला प्रशासन से लेकर महकमे के अफसर भी मानते नजर आए।


जब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एनसीआर में फंसी भीड़ को लाने के लिए शुक्रवार की देर रात बसें भेजने का फैसला किया, तो उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम (यूपीएसआरटीसी) के प्रबंध निदेशक (एमडी) राजशेखर ने पूरे प्रदेश के आरएम से लेकर एआरएम के फोन घनघनाकर उन्हें घरों से बुलाया। एक-एक ड्राइवर घरों से बुलाया गया। हर जिले से बसें गाजियाबाद के लिए रवाना कर दीं। ताकि दिल्ली से आए हजारों गरीब लोग घरों के लिए रवाना हो सके। 

शनिवार को दोपहर करीब ढाई बजे का वक्त था। दिल्ली की सीमा पर स्थित गाजियाबाद के कौशांबी बस स्टेशन पर हजारों लोगों की भीड़ एकत्र थी, जिसमें अधिकांश गरीब मजदूर थे। क्षेत्रीय प्रबंधक (आरएम) ए.के. सिंह बसों की व्यवस्था में जुटे थे। इस बीच उनके पास एमडी राजशेखर का फोन आता है। 

एमडी राजशेखर हर जिले के लिए उपलब्ध बसों की संख्या और यात्रियों के बारे में जानकारी लेते हैं। जब आरएम उन्हें पूरी तरह आश्वस्त कर देते हैं कि बसों से सभी यात्रियों को समुचित तरीके से रवाना कर दिया जाएगा तो उधर से फोन कटता है। पूछने पर आरएम सिंह ने आईएएनएस से कहा, “एमडी साहब बहुत बढ़िया तरीके से हालात को हैंडल कर रहे हैं। लगातार हम सबसे अपडेट ले रहे हैं। एमडी साहब समस्याओं को तुरंत हल करने में रुचि लेते हैं।”

दरअसल, 21 दिनों के लॉकडाउन की घोषणा के बाद से दिल्ली में रहने वाले मजदूरों का पलायन शुरू हो गया। दिल्ली से भारी भीड़ उत्तरप्रदेश की सीमा में दाखिल हो गई। लोग पैदल ही उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों के लिए रवाना होने लगे। भीड़ को काबू करना मुश्किल हो गया। जबकि, उत्तर प्रदेश सरकार ने एक बार जरूर सोचा कि भीड़ जहां है वहीं पर शिविर लगाकर और खाने-पीने के इंतजाम कर रोका जाए।  मगर, दिल्ली से लगातार मजदूरों के बढ़ते पलायन के कारण स्थिति खराब होती गई। आखिरकार उत्तर प्रदेश सरकार ने 27 मार्च की देर रात एक हजार बसों को गाजियाबाद रवाना करने का फैसला किया। amazing book

Saturday, 28 March 2020

CORONA DEATHS VS ROAD ACCIDENT DEATH

                    CHINA
In 2016, the World Health Organisation estimated that more than 700 people were killed every day due to road accidents, South China Morning Post reported.Feb 4, 2020

The overall confirmed cases in the mainland reached 81,394 by the end of Friday. This included 3,295 people who died due to the disease, 3,128 patients and 74,971 patients discharged after recovery, the National Health Commission said.

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               INDIA
In India, two-thirds of road traffic injury (RTI) deaths are reported in the age group 15–44 years. [1] In 2017, officially reported road accidents were 464,910, claiming 147,913 deaths and 470,975 injured persons, that is, 405 deaths and 1,290 injuries each day from 1,274 accidents.

  content="content="https://ak2907.blogspot.com/2020/03/blog-post_12.html" property="og:url">"        USA
For 2016 specifically, National Highway Traffic Safety Administration (NHTSA) data shows 37,461 people were killed in 34,436 motor vehicle crashes, an average of 102 per day.


As of March 28, 2020 at 14:49 GMT, there have been 105019 confirmed cases and 1717 deaths due to coronavirus COVID-19 in the United States.

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नवरात्र में प्रेरणा MOTIVATION Permalink

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Fresh Motivational Quotes in Hindi Permalinkमोटिवेशनल कोट्स)

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“बड़ा आदमी Permalink वह है जो अपने पास बैठे इंसान को छोटा महसूस ना होने दे !
Bada aadmi wah hai jo apne paas baithe insaan ko choota mahsoos na hone de.
Motivational Quote #2
Us kaam ko chune jise aap pasand karte hai fir aap jindgi bhar kaam nahi karenge.
Inspirational Quote #3
“कामयाब लोग अपने फैसले से दुनिया बदल देते है, जब्कि नाकामयाब लोग दुनिया के डर से अपने फैसले बदल देते है !
Kamyaab log apne faisle se duniya badal dete hai, Jabki nakamyab log duniya ke dar se apne faisle badal lete hai.
Motivational Quote #4
Jab aap full confidence ke saath aage badhte hai tab raste apne aap khul jate hai.
Motivational Quote #5
“हमेशा जीत और हार आपकी सोच पर निर्भर करती है, मान लो तो हार होगी, ठान लो तो जीत होगी !
Hamesha jeet or haar aapki soch par nirbhar karti hai. Maan lo to haar hogi, Thaan lo to jeet hogi.

Motivational Quotes in Hindi for Students



Inspirational Quote #6
Chai me gire hue biscuit ko dusre biscuit se nikalne ki koshish mat kijiye. Dimag se kaam le ek mushkil ko khatm karne ke liye dusri mushkil mol na le.
Inspirational Quote #7
“अगर आप सही हो तो कुछ भी साबित करने की कोशिश मत करो, बस आप सही बने रहो, एक दिन वक्त खुद गवाही दे देगा !
Agar aap sahi ho to kuch bhi sabit karne karne ki kosish mat karo, Bas aap sahi bane raho, Ek din wakt khud gawahi de dega.
Motivational Quote #8
Agar aap kisi chiz ko dil se chaho to puri kaynaat aapko use milaane me lag jati hai.
Motivational Quote #9
“भीड़ हमेशा उस रास्ते पर चलती है, जो रास्ता आसान लगता है, लेकिन इसका मतलब ये नहीं कि भीड़ हमेशा सही रास्ते पर चलती है। आपने रास्ते खुद चुने, क्योकि आपको खुद से बेहतर कोई नहीं जानता !
Bheed hamesha us raste par chali hai, Jo rasta asaan lagta hai, Lekin iska matlab ye nahi ki bheed hamesha sahi raste par chalti hai.https://unifiedportal-mem.epfind Apne raste khud chune, Kyoki aapko khud se behtar koi nahi jaanta.

हिंदी सुविचार (मोटिवेशनल कोट्स)

Motivational Quote #10
Aapki ma jaisa bhi khana de use kha lena, Kyoki kisi ke pass khana nahi kisi ke pass ma nahi. Aap bhagyshali ho jiske pass dono hai.
Inspirational Quote #11
“इस दुनिया में कुछ भी असंभव नहीं,https://unifiedportal-mem.epfind हम वो सब कर सकते है जो हम सोच सकते है, और हम वो सब सोच सकते है जो हमने आज तक नहीं सोचा !home made sanitizer

ITALY इटली

इटली में स्थिति फ़िलहाल ऐसी है जहां मुर्दा घर शवों से भर गए हैं और मरने वालों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है.

लेकिन कोरोना वायरस का संक्रमण इटली में इस स्तर पर कैसे पहुंच गया? क्या वजह है कि यूरोप के किसी भी दूसरे देश की तुलना में कोरोना वायरस इटली में अधिक तेज़ी से फैल रहा है और नौ हज़ार से अधिक लोगों की जान ले चुका है.

इटली में आधिकारिक तौर पर कोरोना वायरस संक्रमण की शुरुआत 20 फ़रवरी से हुई. जब एक 38 वर्षीय शख़्स ने लोम्बार्डी के कोडोग्नो कस्बे में अपनी जांच करायी. जब जांच रिपोर्ट आई तो यह व्यक्ति कोरोना वायरस से संक्रमित पाया गया. यह इटली का पहला आधिकारिक तौर पर दर्ज कोविड-19 केस था.

हालांकि कुछ स्वास्थ्य अधिकारी ये मानते हैं कि इटली में इस वायरस का प्रवेश बहुत पहले हो गया था.

इटैलियन नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ़ हेल्थ में डिपार्टमेंट ऑफ़ इंफ़ेक्शियस डिज़ीज़ के एक शोधकर्ता के मुताबिक़, "इटली में यह वायरस काफ़ी वक़्त पहले ही पहुंच चुका था."

वो कहते हैं, "ये ठीक उसी दौरान हुआ जब हम इंफ़्लुएंजा के सबसे ख़राब दौर से जूझ रहे थे और लोग इंफ़्लुएंज़ा के लक्षणों के साथ सामने आ रहे थे."

इटली में पहला केस आने से पहले देश के उत्तरी हिस्से में न्यूमोनिया के कई मामले थे. यह आधिकारिक तौर पर पुष्ट है क्योंकि लोम्बार्डी के कोडोग्नो कस्बे के अस्पताल में कई ऐसे मामले आए थे जिसमें लोगों को निमोनिया की शिकायत थी.

ऐसे में संभव है कि जो लोग इलाज के लिए आए हों वो वायरस से संक्रमित रहे हों लेकिन उनका इलाज वायरस संक्रमण समझकर नहीं बल्कि फ्लू या फिर निमोनिया पीड़ित समझकर किया गया हो. ऐसे में ये लोग वायरस के प्रसार के कारण हो सकते हैं.

लोम्बार्डी का उत्तरी क्षेत्र इस वायरस से सबसे बुरी तरह प्रभावित है. पूरे देश के संक्रमित लोगों में से 85 फ़ीसदी इस क्षेत्र से हैं और जितनी मौतें इटली में हुई हैं उनमें से 92 फ़ीसदी मौतें इस इलाक़े से हैं.

लेकिन इसका मतलब ये बिल्कुल भी नहीं है कि इटली का सिर्फ़ यही इलाक़ा वायरस की चपेट में है. इटली के सभी 20 प्रांत में संक्रमण के मामले दर्ज किए गए हैं.

https://youtu.be/YClve-H4d_0 INDIA 

इटली में इतनी मौत की वजह क्या है?

कुछ अधिकारियों का मानना है कि क्योंकि यह वायरस बिना पहचान में आए फैलता रहा. इस वजह से अब संक्रमण बढ़ने पर इटली में हर रोज़ सैकड़ों की संख्या में मौतें हो रही हैं.

इटली के एक स्वास्थ्य अधिकारी रिकार्डो के मुताबिक़, "जब यह फैलना शुरू हुआ तो हमें इसके बारे में पता नहीं चला. इसका मतलब यह हुआ कि जिस समय हमें इस बात का अहसास हुआ कि यह फैल रहा है, उस समय तक यह इटली में एक चेन के रूप में फैल चुका था."

रिकार्डो मानते हैं कि यही वो वजह है जिसकी वजह से इटली फ़िलहाल के समय में इतनी बड़ी संख्या में अपने लोगों को खोता जा रहा है.

हालांकि कुछ अधिकारी ये भी मानते हैं कि चूंकि इटली में किसी भी यूरोपीय देश की तुलना में अधिक टेस्ट किए जा रहे हैं इसलिए यहां संक्रमित लोगों की संख्या इस क़दर बढ़ती हुई दिख रही है.

नेशनल हेल्थ इंस्टिट्यूट के मुताबिक़, इटली में अभी तक कोरोना वायरस संक्रमण की वजह से जितने लोगों की मौत हुई है अगर उनकी औसत उम्र निकालें तो यह 81 बरस आती है.

यूनाइटेड नेशंस (यूएन) के मुताबिक, जापान के बाद इटली दूसरा ऐसा देश है जहां सबसे ज्यादा बुज़ुर्ग हैं. इसका मतलब यह भी है कि अगर ये लोग कोरोना की चपेट में आ जाते हैं तो इनके गंभीर बीमार होने का सबसे ज़्यादा ख़तरा है.home made sanitizer

AMAZON

ये किताब 1लाख लोगों ने पढ़ी ।देखिए

Amazon ने India में अपना Prime service launch कर दिया है. क्या आप जानते है Amazon Prime kya hai (क्या है) और आप उसका कैसे लाभ उठा सकते है? आज हम उसी बारे में बात करेंगे. Amazon का नाम तो सभी ने सुना होगा, ये एक e-commerce website है जहाँ से पूरी दुनिया के लाखों करोड़ो लोग अपने जरुरतमंद सामान खरीदते हैं.

E-commerce website की वजह से अब shopping करना बहुत ही आसान हो गया है. shopping करने के लिए लोगों को घर से बहार जाने की जरुरत नहीं पड़ती उन्हें जो भी सामान चाहिए होता है वो online आसानी से सही दामों में e-commerce website के जरिये मंगवा लेते हैं. बहुत सारे e-commerce website internet पर मौजूद है जैसे Flipkart.com, myntra.com, Amazon.in, snapdeal.com etc. इन सभी का काम products sell करना है.

Amazon.com पूरी दुनिया में सबसे बड़ा और मसहुर online shopping site है. Amazon एक American international कंपनी है और इस कंपनी ने अपना कारोबार भारत में Amazon.in के नाम से आरम्भ किया है और तब से ही भारत के online marketplace में अपनी एक अलग ही जगह बनाकर रखी है.

कोरोना के समय

कोरोना संक्रमण के मामले देश और दुनिया में हर दिन बढ़ते जा रहे हैं। कोरोना वायरस की वजह से देशभर में लॉकडाउन घोषित कर दिया गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार रात देश के नाम संबोधन के दौरान देशवासियों से लॉकडाउन का ईमानदारी से पालन करने की अपील की। छोटे शहरों से लेकर राजधानी तक अस्पतालों में चिकित्सक कोरोना संक्रमितों के इलाज में लगे हुए हैं। वहीं, लोगों से बार-बार घर में ही रहने की, साफ-सफाई बरतने की और लोगों से नहीं मिलने-जुलने की अपील की जा रही है। इस स्थिति में सबसे ज्यादा बच्चों और बुजुर्गों का ख्याल रखना जरूरी हो गया है।

दरअसल, कोरोना वायरस से अबतक दुनियाभर में जितनी मौतें हुई हैं, उनमें सबसे ज्यादा बुजुर्गों की संख्या शामिल है। चिकित्सक बताते हैं कि उम्र के साथ रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होने लगती है, इसलिए बुजुर्गों को कोरोना वायरस संक्रमण का ज्यादा खतरा रहता है। वहीं बच्चे भी चंचल स्वभाव के होते हैं और उनका घर में स्थिर रहना और कोरोना से सावधान रहना मुश्किल है। ऐसे में उनपर भी नजर बनाए रखने की जरूरत है। आइए, हम कुछ जरूरी बातों की ओर आपका ध्यान दिलाते हैं।

बच्चों और बुजुर्गों के हाथ चेक करें कि कहीं उनके नाखून तो नहीं बढ़े हुए हैं। नाखून में गंदगी जमा होने के साथ बैक्टीरिया भी जगह बना लेते हैं। खाने-पीने के दौरान ये आपके पेट में भी जा सकते हैं और संक्रमित कर सकते हैं। 


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Old Age men - फोटो : Pixabay

बच्चों और बुजुर्गों को पार्क में समय बिताना अच्छा लगता होगा, लेकिन सार्वजनिक स्थलों या ज्यादा भीड़ वाली जगहों पर न ले जाएं. इससे वायरस की चपेट में आने का खतरा काफी बढ़ जाता है।


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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay

घर पर टीवी के रिमोट, बिजली बोर्ड के स्विच, डोर बेल, दरवाजों के हैंडिल, सीढ़ियों के रेलिंग, टेबल वगैरह ऐसी सारी चीजें या सतहें, जहां बच्चे या बजुर्ग हाथ लगाते हैं, उन्हें समय-समय पर सैनिटाइज करते रहें। इसे हर दिन का अभ्यास बनाएं। 


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कोरोना वायरस (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : Pixabay

कोरोना वायरस संक्रमण से बचने के लिए अपने बच्चों को और घर के बुजुर्गों को सामान्य हाइजीन की आदतों के बारे में जागरूक करें। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने बच्चें को कोरोना वायरस के प्रति समझाने के लिए कॉमिक्स भी जारी किया है, जिसमें सुपरहीरो वायु बच्चों के सवालों का जवाब देता है। बच्चों को समझाने के लिए उसकी सहायता लें। 


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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया

सबसे जरूरी यह है कि बच्चों और बुजुर्गों का इम्यून सिस्टम दुरुस्त रहे। उनकी डाइट में पोषक तत्वों से भरा आहार शामिल करें। घर के बच्चे और बुजुर्ग फलों और जूस का भी सेवन करें। समय पर नाश्ता, लंच और डिनर दें। ध्यान रखें कि वे पूरी नींद लें।


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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : social media

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निर्देश पर पूरे देश में 15 अप्रैल तक के लिए लॉकडाउन किया गया है। ऐसे में घर में रहते हुए किसी भी बाहरी अपरिचित व्यक्ति को घर में आने न दें। परिचित, पड़ोसी या रिश्तेदार आते भी हैं तो उन्हें सबसे पहले हाथ, पैर धोने के लिए कहें। सैनिटाइजेशन का पूरा ध्यान रखें। 


 

Friday, 27 March 2020

अखबारों पर कोरोना का कहर

मुंबई के गोरेगांव में रहनेवाले शोभित रॉय ने अपने यहां आनेवाले समाचार पत्र की डिलीवरी 13 दिनों पहले ही कैंसल करवा दी थी.

लेकिन बुधवार को केंद्रीय सूचना और प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर के घर पर भी अख़बार नहीं पहुंचा.

मीडिया इंडस्ट्री से संबंधित मंत्रालय के मुखिया, प्रकाश जावडेकर ने रिपोर्टरों से कहा, "मैंने अख़बार डिलीवर करनेवालों से वजह का पता किया कि ऐसा क्यों हुआ? इस तरह की अफ़वाहें हैं कि समाचार पत्र को छूने से कोरोना वायरस का फैलाव होता है."

विश्व भर में गिरते पाठकों की तादाद के दौरान भी बढ़त जारी रखनेवाले भारतीय समाचार पत्र उद्योग पर कोरोना की भारी मार पड़ी है.

कोलकाता के एक अख़बार डिस्ट्रीब्यूटर अमित गोस्वामी ने समाचार ऐजेंसी एएनआई से कहा है, "हमारी बिक्री 80 फ़ीसदी कम हो गई है."

इंडियन रीडरशिप सर्वे की ताज़ा रिपोर्ट के मुताबिक़ देश में अख़बार के पाठकों की कुल संख्या 42 करोड़ 50 लाख है और समाचारपत्रों ने साल भर के अंदर तक़रीबन एक करोड़ से अधिक पाठकों को ख़ुद से जोड़ा है.

प्रकाश जावड़ेकर ने कहा है कि कुछ हाउसिंग सोसाइटियों ने समाचारपत्र वितरकों के परिसर में प्रवेश पर रोक लगा दी है, "जो बहुत ग़लत है' और लोगों को ये याद रखना चाहिए कि 22 मार्च यानी रविवार को जनता कर्फ़्यू के दौरान उनसे तालियां बजाने का जो आग्रह किया गया था वो मेडिकल स्टाफ़ और मीडियाकर्मियों दोनों के लिए था."

CORONA VIRUS

Still not any medicine or vaccine is build for exact cure of corana's covid 19 disease, the most trust worthy treatment is awareness and social distance. 

Even during the lockdown there are various cases of deaths,
So follow lockdown, keep social distance and avoid social gatherings,as this is viral so very dangerous. 

Thursday, 26 March 2020

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Friday, 6 March 2020