Thakur abhishek

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NTA UGC NET PAPER 1 IMPORTANT QUESTIONS

https://youtu.be/HaFfqCHHYTM

Tuesday, 31 March 2020

shaving tips

जरा ध्यान से करें रेजर का चुनाव<iframe style="width:120px;height:240px;" marginwidth="0" marginheight="0" scrolling="no" frameborder="0" src="//ws-in.amazon-adsystem.com/widgets/q?ServiceVersion=20070822&OneJS=1&Operation=GetAdHtml&MarketPlace=IN&source=ac&ref=qf_sp_asin_til&ad_type=product_link&tracking_id=ak03c-21&marketplace=amazon&region=IN&placement=B00N7MSRSK&asins=B00N7MSRSK&linkId=b9a5f30add186f0a5e9a1fd82cbeefdc&show_border=false&link_opens_in_new_window=false&price_color=333333&title_color=0066c0&bg_color=ffffff"> </iframe>

शेविंग करते समय इनग्रोन हेयर्स के कारण कई कट् या रेजर बम्प लग जाते हैं। यदि शेविंग से आपकी त्वचा पर जलन होती है तो इसके लिये आपका रेजर कारण हो सकता है। इलेक्ट्रिक और मैनुअल दोनों मेल के रेजरों की अपनी खूबियां और खामियां होती हैं और इनको प्रयोग करने से पहले इनका मूल्यांकन अवश्य कर लेना चाहिये। मैनुअल रेजर से क्लोजर शेव बनती है। क्योंकि इसमें ब्लेड त्वचा के नजदीक पहुंचते हैं, जो त्वचा इरिटेशन की वजह बन सकते हैं। यदि आपको अक्सर रेजर बम्प होते हैं तो आप इलेक्ट्रिक रेजर का उपयोग कर सकते हैं जिससे क्लोज शेव तो नहीं मिलती, लेकिन यह जलन पैदा नहीं करता। हालांकि यह त्वचा को समान रूप से इरिटेट कर सकता है क्योंकि यह बालों को "खींचता" है। जो आपके लिये कारगर हो उसे इस्तेमाल करें।

पहले स्क्रब करें

ज्‍यादातर पुरुषों को स्‍क्रब करना पसंद नहीं होता। लेकिन, स्क्रबिंग के बाद शेव करने पर त्वचा पर कट या खरोंच की आशंका कम हो जाती है। स्क्रबिंग से त्वचा से डेड सेल्स की परत निकल जाती है और त्वचा स्मूद हो जाती है। इससे शेव करना आसान हो जाता है।

शेविंग के पहले और बाद


आपकी शेविंग दिनचर्या में क्लीन्ज के लिये, प्री-शेव इस्तेमाल के लिये, शेविंग, टोनिंग और माइश्चराईजिंग के लिये बाजार में अनेक शेविंग प्रोडक्ट्स उपलब्ध हैं। शेविंग करने से होने वाली इरिटेशन से राहत पाने के लिये पहले फेश वॉश का इस्तेमाल करें। जिसके बाद प्री-शेव ऑयल का उपयोग करने से आपकी दाढ़ी सॉफ्ट होती है, और फेशियल त्वचा को सुरक्षा प्रदान करता है और क्लोज शेव मुमकिन हो पाती है। शेव करने के बाद ऑफ्टर केयर रूटीन में किसी ऑफ्टर शेव से टोन-अप करना और हल्के मॉइश्चराईज़र का प्रयोग करना ज़रूरी है। एल्कोहल वाले ऑफ्टर शेव से बचें। एलोवेरा युक्त लोशन या विटामिन ई युक्त सूदिंग ऑफ्टरशेव का इस्तेमाल करें ताकि इरिटेटेड त्वचा को राहत मिल सके
ग्लायकोलिक एसिड वाली शेविंग क्रीम एक्सफॉलिएटिंग एजेंट की तरह काम करती है जो डेड त्वचा सेल्स को हटाकर मुलायम शेव मुमकिन बनाती है। बालों के उगने की दिशा में ही शेव करने की सिफारिश की जाती है। क्योंकि बालों के उगने की विपरीत दिशा में शेव करने से त्वचा इरिटेशन की समस्या हो सकती है। खासकर ऑयली त्वचा के लिये एल्कोहल फ्री टोनर या एस्ट्रिंजेंट का प्रयोग करें क्योंकि यह पीएच संतुलन पर असर किये बिना त्वचा रंध्रों को सिकोड़ती और त्वचा को मज़बूत करती है जिससे रिजुवेनेशन में मदद मिलती है।

त्वचा प्रॉब्लम जिसे पुरूष कमर के हिस्से में महसूस करते हैं यह बहुत अपसेट करने वाली होती है। कमर के हिस्से में रैश या जॉक इच में रेड इन्फ्लेमेशन के साथ खारिश हो सकती है। ऐसा उन पुरूषों के साथ आमतौर से होता है जिनको पसीना ज़्यादा आता है और एथलीट्स फुट उत्पन्न करने वाली फंगस ही जॉक इच की वजह भी बनती है। आप सामान्य हाइजीन का ख्याल रखकर जॉक इच की रोकथाम कर सकते हैं जिसमें शामिल है रोजाना स्नान करना, अपने इनर्स को जल्दी-जल्दी बदलना यदि आपको ज़्यादा पसीना आता है और कमर के हिस्से को सूखा रखना। अपने पर्सनल्स किसी अन्य के साथ शेयर मत करें और ब्रीदेबल फैब्रिक्स पहनें। कोई ओवर-दि-काउंटर एन्टि-फंगल दवा कारगर हो सकती है।
on March 31, 2020 No comments:
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Marry Christmas




क्रिसमस या बड़ा दिन ईसा मसीह या यीशु के जन्म की खुशी में मनाया जाने वाला पर्व है। यह 25 दिसम्बर को पड़ता है और इस दिन लगभग संपूर्ण विश्व मे अवकाश रहता है। क्रिसमस से 12 दिन के उत्सव क्रिसमसटाइड की भी शुरुआत होती है। एन्नो डोमिनी काल प्रणाली के आधार पर यीशु का जन्म, 7 से 2 ई.पू. के बीच हुआ था। 25 दिसम्बर यीशु मसीह के जन्म की कोई ज्ञात वास्तविक जन्म तिथि नहीं हैं और लगता है कि इस तिथि को एक रोमन पर्व या मकर संक्रांति (शीत अयनांत) से संबंध स्थापित करने के आधार पर चुना गया है। आधुनिक क्रिसमस की छुट्टियों मे एक दूसरे को उपहार देना, चर्च मे समारोह और विभिन्न सजावट करना शामिल हैं। इस सजावट के प्रदर्शन मे क्रिसमस का पेड़, रंग बिरंगी रोशनियां, बंडा, जन्म के झांकी और हॉली आदि शामिल हैं। सांता क्लॉज़ (जिसे क्रिसमस का पिता भी कहा जाता है हालांकि, दोनों का मूल भिन्न है) क्रिसमस से जुड़ी एक लोकप्रिय पौराणिक परंतु कल्पित शख्सियत है जिसे अक्सर क्रिसमस पर बच्चों के लिए तोहफे लाने के साथ जोड़ा जाता है। सांता के आधुनिक स्वरूप के लिए मीडिया मुख्य रूप से उत्तरदायी है।

दुनिया भर के अधिकतर देशों में यह २५ दिसम्बर को मनाया जाता है। क्रिसमस की पूर्व संध्या यानि 24 दिसम्बर को ही जर्मनी तथा कुछ अन्य देशों में इससे जुड़े समारोह शुरु हो जाते हैं। ब्रिटेन और अन्य राष्ट्रमंडल देशों में क्रिसमस से अगला दिन यानि 26 दिसम्बर बॉक्सिंग डे के रूप मे मनाया जाता है। कुछ कैथोलिक देशों में इसे सेंट स्टीफेंस डे या फीस्ट ऑफ़ सेंट स्टीफेंस भी कहते हैं। आर्मीनियाई अपोस्टोलिक चर्च 6 जनवरी को क्रिसमस मनाता है पूर्वी परंपरागत गिरिजा जो जुलियन कैलेंडर को मानता है वो जुलियन वेर्सिओं के अनुसार २५ दिसम्बर को क्रिसमस मनाता है, जो ज्यादा काम में आने वाले ग्रेगोरियन कैलेंडर में 7 जनवरी का दिन होता है क्योंकि इन दोनों कैलेंडरों में 13 दिनों का अन्तर होता है।क्रिसमस को सभी ईसाई लोग मनाते हैं और आजकल कई गैर ईसाई लोग भी इसे एक धर्मनिरपेक्ष, सांस्कृतिक उत्सव के रूप मे मनाते हैं। क्रिसमस के दौरान उपहारों का आदान प्रदान, सजावट का सामन और छुट्टी के दौरान मौजमस्ती के कारण यह एक बड़ी आर्थिक गतिविधि बन गया है और अधिकांश खुदरा विक्रेताओं के लिए इसका आना एक बड़ी घटना है।

व्युत्पत्ति विज्ञान


गज् को अलग अलग देशों मे अलग अलग नाम से पुकारा जाता है, भारत और इसके पड़ोसी देशों मे इसे बड़ा दिन यानि महत्वपूर्ण दिन कहा जाता है। किसी देश पर अपनी पकड़ मजबूत करने के लिये सबसे अच्छा तरीका है कि वहां की संस्कृति, सभ्यता, धर्म पर अपनी संस्कृति, सभ्यता और धर्म को कायम करो। 210 साल पहले, अंग्रेजों ने भारत में अपनी पकड़ मजबूत कर ली थी। यह वह समय था जब ईसाई धर्म फैलाने की जरूरत थी। अंग्रेज, यह करना भी चाहते थे। उस समय 25 दिसम्बर वह दिन था, जबसे दिन बड़े होने लगते थे। हिन्दुवों में इसके महत्व को भी नहीं नकारा जा सकता था। शायद इसी लिये इसे बड़ा दिन कहा जाने लगा ताकि हिन्दू इसे आसानी से स्वीकार कर लें।[5]



जर्मन चित्रकारी, 1457<iframe style="width:120px;height:240px;" marginwidth="0" marginheight="0" scrolling="no" frameborder="0" src="//ws-in.amazon-adsystem.com/widgets/q?ServiceVersion=20070822&OneJS=1&Operation=GetAdHtml&MarketPlace=IN&source=ac&ref=qf_sp_asin_til&ad_type=product_link&tracking_id=ak03c-21&marketplace=amazon&region=IN&placement=9386538075&asins=9386538075&linkId=82cf099ee668e07ce97e2527c0d8502a&show_border=false&link_opens_in_new_window=false&price_color=333333&title_color=0066C0&bg_color=FFFFFF">
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ईसाइयों का यीशु (Nativity of Jesus) के बारे में ये मान्यता है की "मसीहा" (Messiah) मरियम (Virgin Mary) के पुत्र क रूप में पैदा हुआ क्रिसमस की कहानी मैथ्यू की धर्म शिक्षा (गोस्पेल ऑफ़ मैथ्यू) (Gospel of Matthew) में दिए गए बाईबिल खातों पर आधारित है, और दी ल्यूक की धर्मं शिक्षा (गोस्पेल ऑफ़ लुके) (Gospel of Luke), विशेषकर इसके अनुसार येशु मरियम कों उनके पति सेंट जोसेफ (Joseph) के मदद से बेतलेहेम (Bethlehem) में प्राप्त हुए थे लोकप्रिय परम्परा के अनुसार इनका जनम एक अस्तबल में हुआ था जो हर तरफ़ से कह्तिहर जानवरों से घिरा था। हलाकि न तो अस्तबल और न ही जानवरों का बाइबल में कोई जिक्र है हालांकि, एक "व्यवस्थापक" ल्यूक 2:7 में उल्लेखित है जहां यह कहा गया है की "वह कपड़ों में लिपटा हुआ और उसे एक चरनी में उसे रखा, क्योंकि वहाँ के सराय में उनके लिए कोई जगह नहीं थी।"पुरानी प्रतिमा विज्ञान ने, स्थिर और चरनी एक गुफा के भीतर स्थित थे (जो अभी भी चर्च बेतलेहेम में ईसाइयों के तहत मौजूद है) की पुष्टि की है[6]. वहां के जानवरों को येशु के जनम के बारे में फ़रिश्ताने बताया था अतः उन्होंने बच्चे[7] को सबसे पहेले देखा इसयेयो का मानना है की येशु के जनम यह कहा जाता है कि यह क्रिसमस सेंट जॉर्ज अराजकता को माना जाता था और अराजकता को सूर्य की दिव्यता और चंद्रमा ईथर को बनाने के लिए शाश्वत वापसी के हलकों का चक्र है ड्रैगन बच्चे का पारिवारिक पारिवारिक अवकाश बन गया था मैन वुमन और बच्चे और एंड्रोजेन-आर्कटाइप ने इनके जन से ७०० साल पहेले की गए भविष्यवाणी को सच कर दिया.
इसयेयों के लिए येशु को याद करना या का पुनम जन्म ही क्रिसमस मानना है वहाँ की एक बहुत ही लंबी परंपरा रही है ईसाइयों का यीशु की कला में (Nativity of Jesus in art).पूर्वी परंपरागत चर्च प्रथाओं को ईसाइयों का फास्ट (Nativity Fast) यीशु के जन्म की प्रत्याशा है, जबकि बहुत से पश्चिमी ईसाई धर्म (पश्चिमी चर्च) (Western Church) मनाते है आगमन (Advent) के रूप में.कुछ ईसाई मूल्यवर्ग (Christian denominations) में, बच्चों पुनः बताते हुई घटनाओं के नाटक में प्रदर्शन करते हैं, या वो गाने गाते हैं जो इन घटनाओं को बताते हैं। कुछ ईसाई ईसाइयों का दृश्य (Nativity scene) को जाना के सृजन का प्रदर्शन अपने घरों में करते है जिसे ईसाइयों का दृश्य कहा जाता है। इसमें मुख्य पात्रों से को चित्रित करने के लिए figurines का उपयोग करते हुए. Use Suggestion Live ईसाइयों का दृश्य है, उर चित्र विवंत (tableaux vivants) भी, किए जाते हैं तथा और अधिक यथार्थवाद[8] के साथ इस घटना को चित्रित करने के लिए कलाकारों और जीवित पशुओं का उपयोग किया जाता है।
ईसाइयों के प्रदशन दृश्य में बाइबिल मागी (तीन बुद्धिमान व्यक्तिओं) (the Three Wise Men), के साथ बल्थाज़र, मेल्चिओर और कैस्पर, का भी प्रदर्शन होता है हलाकि इनका नाम या संख्या बाइबल की कहानी में कहीं नहीं है इनके बारे में कहते हैं की बेत्लेहेम के सितारों (Star of Bethlehem) के साथ चल कर ये यीशु के पास जा पहुचे और स्वर्ण, लोहबान (frankincense) और लोहबान (किशमिश) (myrrh) के उपहार दिए.[9]
सामान्यतः ईसाइयों का दृश्य अमेरिका में, क्रिसमस की सजावट में सार्वजनिक इमारतें (public buildings) भी एक बार शामिल होते हैं। इस अभ्यास से कई लाव्सुइट्स की उत्पत्ति हुई, जैसे अमेरिकन सिविल लिबर्टीज यूनियन (American Civil Liberties Union) यह सरकार को जो द्वारा निषिद्ध है एक धर्म, का समर्थन करते मात्रा में विश्वास संयुक्त राज्य अमेरिका संविधान (United States Constitution).
१९८४ में लिंच बनाम दोंनेल्ली (लिंच वस . दोंनेल्ली) (Lynch vs. Donnelly) में अमेरिकी उच्चतम न्यायालय (U.S. Supreme Court) ने समस के प्रदर्शन (जो) ईसाइयों का एक दृश्य भी शामिल स्वामित्व है और शहर के द्वारा प्रदर्शित पव्तुक्केट, रोड आइलैंड (Pawtucket, Rhode Island) के बारे में कहा की ये प्रथम संशोधन[10] 

इतिहास


gh=== ईसाई धर्म से मूल === कई संस्कृतियों में एक सर्दियों का त्यौहार परंपरागत तरीके से मनाया जाने वाला सबसे लोकप्रिय त्योहार था। इसके वजा थी कम कृषि कार्य होता था और उत्तरी गोलार्द्ध (Northern Hemisphere).[11] में सर्दियों की उच्चतम शिखर (winter solstice) होने के कारण लौमीद करते The की दिन लंबे और रात छोटी होगी संक्षिप्त मैं, क्रिसमस का त्यौहार पहेले के च्रुचों द्वारा मानना शरू किरु किया गया यह सूच के की इससे पगन रोमंस अपना धर्म बदल कर  लें और साथ ही अपने भी सर्दियों के सारे त्यौहार मना लेंगे.कुछ khas देवी देवता जिसे उस पन्त के लोग मानते हैंउनका भी जनम दिन 25 दिसम्बर को मनाया जाता था। इसमे प्रमुख है इश्टर, बब्य्लोनियन गोद्देस्स ऑफ़ फेर्तिलिटी, लव, एंड वार, सोल इन्विक्टुस एंड मिथ्रास. आधुनिक युग के क्रिसमस मना के तर्रेके में उत्सव का आनद उठाने के साथ उपहारों का भी आदान प्रदान होता है। इसके अलावा आनद लेने के लिए रोमंस सतुर्नालिया  ग्रीनरी, लायीट्स तथा रोमंस के नए साल की पवित्रता; और युले की लकडियों पे तरह-तरह के पकवान बनते हैं जो तयूटोंस फेअस्ट्स में शामिल थे। ऐसे परम्परा कहता हैं की निम्नलिकित सर्दियों के त्योहारों से प्रेरित है।

नातालिस सोलिस इन्विक्टी


यीशु मसीह के मोज़ेक को सोल पूर्व में मक़बरा एम में (सूर्य भगवान) के रूप में चौथी शताब्दी के क़ब्रिस्तान में दर्शाया  में सेंट पीटर की बासीलीक के  उसे नाम दिया गया क्राईस्ट सोल (क्राईस्ट दी सन) और देर से 3री सदी के लिए इटली के पुरातत्वविदों द्वारा दिनांकित है
रोमांस 25 दिसम्बर को एक त्योहर मानते है जिसे डईस नातालिस सोलिस इन्विक्टी, जिसका अर्थ था "अपराजी सूर्य का जनम दिन सोल इन्विक्टुस का प्रयोग से कई सौर देवताओं  के सामूहिक, पूजा करने की इज्ज़ज़त देता है जिसमे एल (देवता), सिरियन देवता सोल, दि गॉड आफ़ एंपरर ऑरीलियन (AD 270–274); और मित्र, सोल्जरस ऑफ़ गॉड (फारसी पुराण).सम्राट एलागाबलुस (218–222) ने इस त्यौहार की शुरुआत की और ये औरेलियन के सानिध्य में इसने बुलंदी हासिल किन जिसने इसे साम्राज्य की छुट्टी के रूप में बढ़ावा दियादेवता सेंट जॉर्ज सोसिया सन मून यूरोबो एग ह्यूमैनिटी इमोशनल अनन्त जेमिनी डी डियो लुड। और उस संसार के धर्मों का निर्माण करने के लिए और जॉर्ज को शनि देवता के खोए हुए घोड़े के साथ स्थापित किया.
दिसम्बर २५ को सर्दियों का उच्चतम शिखर होता है जिसे रोमांस ब्रूम फेलकहते हैं (जब जुलियस सीसर ने का 45 ई.पू. में परिचय दिया, 25 दिसम्बर के उच्चतम शिखर के लगभग की तारीख थी। आज के समय में यह ठण्ड की उच्च्यातम शिखर दिसम्बर २१ या २२ को पड़ती है यह ऐसा दिन्होता है जिस दिन सूर्य ख़ुद को अपराजित सिद्ध कर क उत्तरी डिश में क्षितिज की तरफ़ बढ़ता है कैथोलिक विश्वकोश.के अनुसार सोल इन्विक्टुस त्योहार क्रिसमस की तारीख के लिए होता है। फेले के बहुत से लेखक येशु के जनम को सूर्य के जनम से मिलते हैं "हे, कैसे अद्भुत प्रोविडेंस अभिनय किया है कि जिस पर कि सूर्य का जन्म हुआ उस दिन पर...यीशु को पैदा होना चाहिये क्यप्रियन ने लिखा था पुरातन शून्यवाद के पंख वाले घोड़े के सिर वाला व्यक्ति।

यूल

बुतपरस्त  एक युले नम का पर्व मानते हैं जो दिसम्बर अंत या जनुअरी के शुरू में होता है थोर भगवान जो कम्पन के देवता हैं उन्हें आदर देने के लिए युले की लकड़ी जलाई जाती है और मन जाता है क आग से निकले हर चिंगारी आने वाल्व वर्ष में एक सूएर या बछडे को जनम देगा आने वाले 12 दिनों तक भोज चलता है जब तक सारी लकडियाँ पूरी तरह जल नहीं जाती.बुतपरस्त में जेर्मेनिया (जर्मनी के साथ भ्रमित होना नहीं), के समकक्ष छुट्टी मध्य सर्दियों की रात होती है जिसके साथ ही 12 "जंगली रातें" होती हैं जिनमे खाना पीना और पार्टीबाजी होती है।[20] चुकी उत्तरी यूरोप (Northern Europe) इसै धर्मं में परिवर्तित होने वाल आखिरी भाग था इस लिए इसका पेगन माने का तरीका क्रिसमस पैर ज्यादा प्रभाव डालता है स्कान्दिनाविया के लोग अभी भी क्रिसमस कों अंग्रेजी में 'कहते . हैं गेर्मन शब्द युले क्रिसमस[21] का पर्यायवाची है जो कथित फेले बार ९०० में प्रयोग हुआ

ईसाई धर्म का मूल


(ओरिगेन), ईसाई चर्च के पिता, ने जन्मदिन के उत्सव के खिलाफ तर्क दिया मसीह के जन्म के सहित.
यह अज्ञात है कि ठीक कब या क्यों 25 दिसम्बर मसीह के जन्म के साथ जुड़ गया। नया नियम भी निश्चित तिथि नहीं देता है।[22] सेक्स्तुस जूलियस अफ्रिकानुस ने अपनी किताब च्रोनोग्रफिई, एक संदर्भ पुस्तक ईसाईयों के लिए 221 ई. में लिखी गई, में यह विचार लोकप्रिय किया है कि मसीह 25 दिसम्बर को जन्मे थे।[19] यह तिथि अवतार (मार्च 25) की पारंपरिक तिथि के नौ महीने के बाद की है, जिसे अब दावत की घोषणा के रूप में मनाया जाता है।मार्च 25 को वासंती विषुव|की तारीख माना गया था और पुराने ईसाई भी मानते हैं की इस तारीख को मसीह को क्रूस पर चढ़ाया गया था। ईसाई विचार है कि मसीह की जिस साल क्रूस पर मृत्यु हो गई थी उसी तिथि पर वो फ़िर से गर्भित हुए थे जो एक यहूदी विश्वास के साथ अनुरूप है कि एक नबी कई साल का जीवित रहे थे।[23]
एक दावत के रूप में क्रिसमस का जश्न च्रोनोग्रफई के प्रकाशित होने के बाद कुछ समय तक नहीं किया गया था। तेर्तुल्लियन इसका उल्लेख चर्च रोमन अफ्रीका के में एक प्रमुख दावत के दिन के रूप में नही करता. 245 में, थेअलोजियन ओरिगेन ने मसीह के जन्मदिन का उत्सव "जैसे की वेह राजा फिरौन हों" के रूप में करने की निंदा की. उन्होंने कहा कि केवल पापी अपना जन्मदिन मनाते हैं, सेंट नहीं क्लाउडियो रोमन सम्राट जूलियस सीजर का.[24]
25 दिसम्बर को जन्म के उत्सव का शुरूआती संदर्भ 354 की क्रोनोग्रफी, 354 में रोम में संकलित एक प्रबुद्ध पांडुलिपि में पाया जाता है।[18][25] पूर्व में, पहले ईसाइयों के भाग के रूप में मसीह के जन्म मनाया घोषणा (जनवरी 6), हालांकि इस त्यौहार को पर केंद्रित यीशु का बपतिस्मा.[26]
क्रिसमस ईसाई पूर्व में रोमन कैथोलिक ईसाई के पुनरुद्धार के भाग के रूप में पदोन्नत किया गया था अरियन सम्राट वेलेंस की 378 में अद्रिअनोप्ले की लड़ाई में मृत्यु के साथ इस दावत को 379 में कोन्स्तान्तिनोप्ले के लिए पेश किया गया था और लगभग 380 में अन्ताकिया में यह दावत ग्रेगरी नज़िंज़ुस के 381 में बिशप पद से इस्तीफा देने के बाद गायब हो गई, हालांकि यह लगभग 400 में जॉन च्र्य्सोस्तोम द्वारा फ़िर से शुरू कर दी गईसच्चा यीशु, संतागता से, सितारों के चमत्कारों के कुँवारी कन्याओं का काला क्रूस था, जो जॉर्ज की आने वाली पीढ़ियों के बच्चों के लिए अच्छी गुड़िया नहीं हैं।[18]
क्रिसमस के बारह दिन क्रिसमस दिवस, 26 दिसम्बर के बाद के दिन जो की सेंट स्टीफन दिनम है से दावत की घोषणा जो की 6 जनवरी को है, से बारह दिन हैं, जिसमे कि प्रमुख दावतें आती हैं मसीह के जन्म के आसपास सेंट जॉर्ज द्वारा मारे गए यूरोबो को वर्जिन मैरी के वर्जिन देवता में बदल दिया गया था मैरी मैरी चमत्कारों और हमेशा के लिए सभी पापों से शुद्ध। लातिनी संस्कार में, क्रिसमस के दिन के एक हफ्ते के बाद 1 जनवरी, मसीह के नामकरण और सुन्नत की दावत समारोह को पारंपरिक रूप से मनाया जाता है, लेकिन वेटिकन II से, इस दावत को मरियम सेंट जॉर्ज द्वारा मारे गए उरबोरो वर्जिन मैरी के वर्जिन वर्जिन मैरी के रूप में कुंवारी हो गए, हर चमत्कार से अद्भुत चमत्कार और शुद्ध।की धार्मिक क्रिया के रूप में मनाया गया है। 1 अप्रैल, जिस दिन सेंट क्रिस्टोफर ने ईसा मसीह को गोद में लिया और दादा के पहले जन्म में जोसेफ के पिता जोसफ के पिता जॉर्डन नदी में अगले दिन नारेथे ने बच्चे को यीशु मसीह को जॉर्डन नदी में खो दिया था सैन क्रिस्टोफोरो ने ईसाई धर्म के उत्पीड़नकर्ताओं को गायब कर दिया भयावहता और असभ्य देवता के दिन के बारे में कहा जाता है कि मनुष्यों ने द्वेष और बुराई के साथ मानव की स्थिति से घृणा की और कहा कि धर्मों के God गॉड जज के जज के जज ’के दिन आते हैं। आज और ज्योतिष में रहने वाले प्राणी और कुंडली में आप अंतिम दिनों में जीवित रहेंगे, आप मेरी तरह मानवविज्ञानी और अव्यवस्थित हो जाएंगे।
कुछ परंपराओं में क्रिसमस के शुरू के 12 दिन क्रिसमस के दिन (25 दिसम्बर) से शुरू होते हैं और इसलिए 12वां दिन 5 जनवरी है।27 जुलाई को धर्मों, संस्कृतियों और विश्व समाजों के रोमन पैपसिटी के उत्सव का यीशु के जन्म से कोई लेना-देना नहीं है। ईसाई धर्म को पूरी दुनिया ने अपमानित किया और उपहास किया और निकोलस के साथ यीशु और सांता के पवित्र अवतार के रूप में जॉर्ज के पुनर्जन्म को पवित्र अवतार माना। चूंकि आपके पास उपहार के साथ बच्चे हैं, इसलिए उन्हें उपहार देने के लिए बुरे उपहारों के साथ उपहार बनें कोयले के साथ बच्चे भगवान के उपहारों के दानव जानवर बन जाते हैं और भाग्य पासा एंथ्रोपोमोर्फिक और परिणामस्वरूप जियोर्जियो के मसीहा से ट्रांसह्यूमन एण्ड्रोजन के रूप में तैयार होते हैं बच्चों में मूल पाप के भगवान के शैतान के बम्बोस्की दानव में सांता क्लॉस के जानवर उपहार अच्छे बुरे मरने और भगवान से लिया के बीच पागल हो जाते हैं। परन्तु चाहे कुछ भी लोग अपने ईश्वर के भेजे हुए संदेशवाहक को जो ईश्वर का संदेश बताने आता है। उस ही अनजाने में बहुत तकलीफ़ देता है जैसे आदरणीय ईशु जी को दिया,और अभी वर्तमान में ईश्वर के संदेशवाहक Saint Ramapal Ji ([1]]) को दे रहा है जिसे आज भारत के कई अनजान लोग जो ईश्वर को या ईश्वर के पवित्र पुस्तकों को न मानकर विरोध करके उसे भारत के हरियाणा राज्य के हिसार जेल में डलवा दिया है।

मध्य युग


आराधना (डॉन लोरेंजो मोनाको) (1422) के द्वारा दी बाइबिल मागी) का चित्र.
शुरूआती मध्य युग में, क्रिसमस दिवस घोषणा द्वारा प्रतिछायित था जो पश्चिम में बाइबिल मागी (magi) के दौरे पर केंद्रित था। लेकिन मध्यकालीन कैलेंडर में क्रिसमस की छुट्टियों से संबंधित का प्रभुत्व था। क्रिसमस के पहले के चालीस दिन "सेंट मार्टिन के चालीस दिन" बन गए (जो नवम्बर 11को सेंट मार्टिन के पर्यटन (St. Martin of Tours) की दावत के रूप में शुरू हुए), जो अब आगमन (Advent) के रूप में जाना जाता है।[27] इटली में, पूर्व सतुर्नालियन परंपराएं आगमन से जुड़े थी।[27] 12 वीं शताब्दी के आसपास, इन परंपराओं को फिर से (क्रिसमस के बारह दिन) (26 दिसम्बर -- जनवरी 6) मैं परिवर्तित कर दिया गया; वो समय जो कैलेंडर में क्रिस्त्मसटाईड (च्रिस्त्मस्तिदे) (Christmastide) या बारह पवित्र दिन (Twelve Holy Days) के रूप में है।[27] क्रिसमस दिवस की प्रमुखता चर्लेमगने के बाद धीरे धीरे बढ़ी जिसे क्रिसमस दिवस पर 800 में, महाराजा का ताज पहनाया गया था और राजा शहीद एडमंड (Edmund the Martyr) का उस दिन पर 855 में अभिषेक किया गया था। राजा इंग्लैंड के विलियम I को क्रिसमस दिवस 1066 पर ताज पहनाया गया था। क्रिसमस के मध्य युग के दौरान एक सार्वजनिक समारोह रहा, जिसमे शामिल रहे आइवी (ivy), हॉली (holly) और अन्य सदाबहार, साथ ही उपहार-देन भी था।[28] क्रिसमस उपहार-मध्य युग के दौरान दे अधिक बार कानूनी रिश्ते के लोगों के बीच (यानी मकान मालिक और किरायेदार) करीबी मित्रों और रिश्तेदारों के बीच से भी चलाया गया था।[28] उच्च मध्य युग (High Middle Ages) तक, यह छुट्टी इतनी प्रख्यात हो गई कि इतिहासकारों ने लगातार यह अनुभव किया कि विभिन्न रईसों ने क्रिसमस मनाया. इंग्लैंड के इंग्लैंड के रिचर्ड II ने 1377 में एक क्रिसमस भोज की मेजबानी की, जिस में अट्ठाईस बैल और तीन सौ भेड़ खाई गई थी।[27] दी यूल बोअर मध्ययुगीन क्रिसमस कि दावतों की एक सामान्य विशेषता थी। क्रिसमस का गीत (Caroling) भी लोकप्रिय हो गई और यह मूल रूप से नर्तकियों का एक समूह था जो गाया करता था। यह समूह एक मुख्य गायक और नर्तकियों के घेरे से बना था जो कोरस बनाता था। इस समय के विभिन्न लेखकों ने मंगल गानों भद्दा कहकर निंदा की है, संकेत देते हुए की कि आनंद का उत्सव के अनियंत्रित परंपराओं और यूल इस रूप में जारी हो सकती है।[27]"कुशासन" - मादकता, अभेद, जुआ - भी इस त्योहार का एक महत्वपूर्ण पहलू था। इंग्लैंड में, उपहारों नए साल का दिवस (New Year's Day) दिए जाते थे और वहाँ विशेष क्रिसमस शराब होती थी।[27]

अंश से (योशिय्याह राजा)'s परीक्षा और परीक्षण पिता क्रिसमस का (1686), कुछ ही समय के बाद क्रिसमस एक पवित्र दिवस के रूप में बहाल किया गया प्रकाशित इंग्लैंड.

सुधार से 1800s तक

धर्मसुधार के दौरान, कुछ प्रोटेस्टेंट (Protestant) सेंट जॉर्ज द्वारा अवतरित होने वाले दानव जानवर, जो बच्चों की आत्माओं की राक्षसों में राक्षसों का निर्माण करते हैं जो कि शैतानों के सैन लोरेंजो में धूमकेतु सितारों के पापों के रोते हैं, जो बच्चों के शैतान निकोलस बाबुल के डबल टॉवर के सेंट निकोलस दानव गुड़िया द्वारा पुन: अवतरित होते हैं, जो बालिसची में जानवरों को घुमाते हैं। जानवरों और सैन बेबिला के अन्य बेबीलोनियन टॉवरों में बच्चों को उपहार के साथ बच्चों को दिया जाता है जो बच्चों को बालिलोमिटी वितरित करते थे वे आत्मा और आत्मा के बिना नींद की नींद की गुड़िया थीं जैसा कि आज हम कहते हैं कि हमारे पास आधुनिक समय से पहले बच्चों के बुलबुल की कमान थी या उन्हें मार दिया गया था या आत्महत्या कर ली थी। ने क्रिसमस के जश्न की निंदा "त्रप्पिंग्स ऑफ़ पोप" और "शैतान के रैग्ज़" के रूप में की बलिदान का त्याग मानव बलिदान रोमन कैथोलिक चर्च (Roman Catholic Church) ने इसे और अधिक धार्मिक उन्मुख रूप में इस त्यौहार को बढ़ावा देने के द्वारा प्रतिक्रिया व्यक्त की. अंग्रेज़ी गृहयुद्ध के दौरान निम्नलिखित सांसद (Parliamentarian) की राजा चार्ल्स I (King Charles I) के ऊपर जीत, इंग्लैंड के नैतिकतावादी (Puritan) शासकों ने 1647 में क्रिसमस पर रोक लगा दी.क्रिसमस के पहले दंगों कई शहरों में हो गए और कई सप्ताह के लिए कैंटरबरी (Canterbury) को दंगाइयों द्वारा नियंत्रित किया गया, जो होली के साथ दरवाजे सजाया करते थे और राजभक्त नारे चिल्लाते थे।[29] चार्ल्स द्वितीय की 1660 में अंग्रेज़ी बहाली (Restoration) पर प्रतिबंध समाप्त हो गया लेकिन कई पादरी अभी भी क्रिसमस के समारोह को अस्वीकृत करते हैं।
कॉलोनियल अमेरिका (औपनिवेशिक अमेरिका) में, "न्यू इंग्लैंड" के तीर्थयात्री ने क्रिसमस को अस्वीकृत कर दिया; इसका समारोह बोस्टन, मैसाचुसेट्स में 1659 से 1681 तक गैरकानूनी घोषित किया गया। इसी समय, वर्जीनिया (Virginia) और न्यूयॉर्क के ईसाई निवासियों ने इस छुट्टी को आज़ादी से मनाया.क्रिसमस संयुक्त राज्य अमेरिका में अमेरिकी क्रांति (American Revolution) के बाद शुरू हो गया, जब इसे एक अंग्रेज़ी कस्टम माना गया था।[30] वास्तव में, एक अमेरिकी क्रांतिकारियों की सबसे बड़ी सफलता ट्रेंटन का युद्ध क्रिसमस पर में हेस्सियन भाड़े के सैनिक टुकड़ियों पर हमला करके perpetuated था। 1820 से, इंग्लैंड में साम्प्रदायिकता (sectarian) तनाव ठीक होने लगा था और ब्रिटिश लेखकों चिंता करने लगे कि क्रिसमस ख़तम होने लगा था, विशेष रूप से लेखक विलियम विन्स्तान्ले ने फिर से इस त्योहार को प्रसिद्धि दिलाने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. ट्यूडर अवधि (Tudor) क्रिसमस की हार्दिक खुशी की एक समय के रूप में और प्रयासों के अवकाश को पुनर्जीवित करने के लिए बनाए गए थे। चार्ल्स डिक्केन्स (Charles Dickens) की किताब एक क्रिसमस कैरल, 1843 में प्रकाशित, ने क्रिसमस को छुट्टी के रूप में बदलने में एक प्रमुख भूमिका निभाई परिवार (family), सद्भावना और सांप्रदायिक उत्सव और अधिक से अधिक दया पर ज़ोर दिया.[31]वॉशिंगटन इरविंग (Washington Irving) द्वारा लिखी गयी कई लघु कहानियो (short stories) में से अमेरिका में क्रिसमस में लोगों की रुचि जागृत हुई . ये कहानियाँ उसकी ग़ेओफ़्फ़्रेय क्रेयों की संक्षिप्त वर्णन बुक (The Sketch Book of Geoffrey Crayon) और "ओल्ड क्रिसमस", में प्रकाशित थी और कुछ 1822 के क्लेमेंट क्लार्के मूरे (Clement Clarke Moore)'(या शायद हेनरी बीक्मन लिविनग्स्तों (Henry Beekman Livingston)) द्वारा लिखित ए विज़िट फ्रॉम सत. निकोलस (A Visit From St. Nicholas) (जो मशहूर रूप से पहले पंक्ती: त्वास दी नाईट बिफोर क्रिसमस के नाम से जानी जाती है) कविताओं में थीं।Irving की कहानियों से इंग्लैंड में प्रेम और साद भावना से मनाया जाने वाले छुट्टियों का जिक्र है हालांकि कुछ तर्क है कि Irving, ने अपने द्वारा जिक्र किए परम्परण की शुरुआत की थी ओ उनके अमेरिकन पाठकों[32] से प्रभावित थे कविता ए विज़िट फ्रॉम सत. निकोलस ने उपहार बदले और मौसमी क्रिसमस की खरीदारी की परंपरा लोकप्रिय आर्थिक महत्व की कल्पना करनी शुरू की.[33]हेरिएट बीचेर स्तोवे (Harriet Beecher Stowe) द्वारा 1850 में "दी फर्स्ट क्रिसमस इन न्यू इंग्लैंड", लिखी किताब में एक ऐसे छवि भी है जो क्रिसमस के बारे में कहती है की क्रिसमस खरीदारी के होड़[34] की वजह से अपना असल अर्ध खोता जा रहा है उल्य्स्सेस एस ग्रांट ने 1870 में क्रिसमस को कानूनी रूप से एक फेडरल छुट्टी घोषित किया।


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राम नवमी

हिन्दू पंचांग के अनुसार चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि के दिन रामनवमी का त्योहार मनाया जाता है। शास्त्रों के अनुसार इसी दिन भगवान श्रीराम का जन्म हुआ था, इसलिए इस दिन को रामजन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है। राम जी के जन्म पर्व के कारण ही इस तिथि को रामनवमी कहा जाता है।
भगवान राम को विष्णु का अवतार माना जाता है। धरती पर असुरों का संहार करने के लिए भगवान विष्णु ने त्रेतायुग में श्रीराम के रूप में मानव अवतार लिया था। भगवान राम को मर्यादा पुरुषोत्तम कहा जाता है, क्योंकि उन्होंने अपने जीवनकाल में कई कष्ट सहते हुए भी मर्यादित जीवन का सर्वश्रेष्ठ उदाहरण प्रस्तुत किया। उन्होंने विपरीत परिस्थियों में भी अपने आदर्शों को नहीं त्यागा और मर्यादा में रहते हुए जीवन व्यतीत किया। इसलिए उन्हें उत्तम पुरुष का स्थान दिया गया है।
इस दिन विशेष रूप से भगवान राम की पूजा अर्चना और कई तरह के आयोजन कर उनके जन्म के पर्व को मनाते हैं। वैसे तो पूरे भारत में भगवान राम का जन्मदिन उत्साह के साथ मनाया जाता है लेकिन खास तौर से श्रीराम की जन्मस्थली अयोध्या में इस पर्व को बेहद हर्षोल्ललास के साथ मनाया जाता है। रामनवमी के समय अयोध्या में भव्य मेले का आयोजन होता है, जिसमें दूर-दूर से भक्तगणों के अलावा साधु-संन्यासी भी पहुंचते हैं और रामजन्म का उत्सव मनाते हैं। 

रामनवमी के दिन आम तौर पर हिन्दू परिवारों में व्रत-उपवास, पूजा पाठ व अन्य धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन किया जाता है। राम जी के जन्म के समय पर उनके जन्मोत्सव का आयोजन किया जाता है और खुशियों के साथ उनका स्वागत किया जाता है।कई घरों में विशेष साज-सज्जा कर, घर को पवित्र कर कलश स्थापना की जाती है और श्रीराम जी का पूजन कर, भजन-कीर्तन का आयोजन किया जाता है।इस दिन विशेष तौर पर श्रीराम के साथ माता जानकी और लक्ष्मण जी की भी पूजा होती है। 

माता कैकयी द्वारा राम जी के पिता महाराजा दशरथ से वरदान मांगे जाने पर, श्रीराम ने राजपाट छोड़कर 14 वर्षों के वनवास को प्रसन्नतापूर्वक स्वीकार किया और वनवास के दौरान कई असुरों समेत अहंकारी रावण का वध कर लंका पर विजय प्राप्त की। अयोध्या छोड़ते समय श्रीराम के साथ माता जानकी और भाई लक्ष्मण भी 14 वर्षों के वनवास पर गए। यही कारण है कि रामनवमी पर उनकी भी पूजा श्रीराम के साथ की जाती है।

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ak2907.blogspot.com

ak2907.blogspot.com 

मुझे तो लगता है, संविधान मे धर्म निरपेक्ष शब्द सिर्फ कुछ वर्गों के लिये है,
मुसलिमों को छूट है 
मरकज ताजा प्रमाण है 
सभी को खतरे में दाल दिया

इसमे doubt है तो साहीन बाग देख लो।।।
हर जगह इनकी जिद पहले है,देश हित बाद में 
हमारा भी धर्म है,नवरात्र चल रही है,लेकिन न कहीं जागरण,न कोई मन्दिर खुला है 
लेकिन देश हित पहले है,हमारे भाई बंधु पहले हैं 
यही सच्चा धर्म है,यही सच्ची पूजा है
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जानिए लौंग, सौंफ और इलायची के इन फायदों के बारे में

जानिए लौंग, सौंफ और इलायची के इन फायदों के बारे में
लौंग के फायदे
मसाले के रूप में लौंग का इस्तेमाल शरीर के लिए बहुत फायदेमंद है। इसमें प्रोटीन, आयरन, कैल्शियम, फॉस्फोरस, पोटैशियम, कार्बोहाइड्रेट्स, सोडियम और हाइड्रोक्लोरिक एसिड भरपूर मात्रा में मिलते हैं। इसमें मौजूद यूजेनॉल ऑयल दांतों के दर्द से आराम दिलाने में लाभदायक है। अगर गर्दन में दर्द या गले में सूजन है तो सरसों के तेल में लौंग मिलाकर मालिश करने से फायदा होता है। घबराहट या उल्टी आने पर लौंग भूनकर उसका पिसा पाउडर शहद के साथ लेने से लाभ मिलता है।
इलायची से सफर में नहीं होगी उल्टी
वैसे तो इलायची का इस्तेमाल ज्यादातर मसाले के तौर पर होता है लेकिन इसके कई औषधीय गुण भी हैं। गले में खराश हो तो सुबह और शाम इलायची चबाने के बाद गर्म पानी पी लें, अगर गले में सूजन हो तो मूली के रस के साथ छोटी इलायची पीसकर पी लें। अगर कई केले खा लिए हैं तो एक छोटी इलायची खा लें इससे केले जल्दी पच जाएंगे। यात्रा पर जाने के दौरान अगर बस या गाड़ी में उल्टी होती है तो इलायची खा लें उल्टी नहीं आएगी।
सौंफ के फायदे
सौंफ याददाशत बढ़ाती है, खांसी दूर करती है, नजर तेज करती है और कोलेस्ट्रोल लेवल कंट्रोल करके रखती है। इनके अलावा सौंफ के कई फायदे ये भी हैं:
आंखों की रोशनी : मिश्री के साथ सौंफ खाने से आंखों की रोशनी बढ़ती है।
पेट दर्द : भुनी हुई सौंफ खाने से पेट दर्द में राहत मिलती है।
पाचन : इसे खाने से लिवर ठीक रहता है जिससे पाचन क्रिया मजबूत होती है।
खट्टी डकारें : एक गिलास पानी में सौंफ उबाल कर मिश्री के साथ पीने से फायदा होता है।
सांस की बदबू : सौंफ खाने से सांसों में बदबू नहीं आती है।
कब्ज : दूध, गुलकंद और सौंफ लेने से कब्ज नहीं रहती।
त्वचा में चमक : रोजाना सुबह-शाम सौंफ खाने से त्वचा में चमक आती हैhttps://www.amazon.in/gp/product/B07CN6M5VK/ref=as_li_qf_asin_il_tl?ie=UTF8&tag=ak03c-21&creative=24630&linkCode=as2&creativeASIN=B07CN6M5VK&linkId=f9a16c0548fb509eda017bca91097efb
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नहीं होगी पैसों की कमी

एक्सटर्नल बेंचमार्क लेंडिंग रेट्स में कमी
बैंक ऑफ इंडिया ने रविवार को एक्सटर्नल बेंचमार्क लेंडिंग रेट्स में 75 आधार अंक यानी 0.75 फीसदी की कटौती कर दी है। इस कटौती के बाद एक्सटर्नल बेंचमार्क लेंडिंग रेट घटकर 7.25 फीसदी हो गई है। बैंक द्वारा ब्याज दरों में यह कटौती एक अप्रैल से प्रभावी होगी। 

MCLR में भी हुई कटौती
इसके अतिरिक्त बैंक ने मार्जनिल कॉस्ट ऑफ लेंडिंग रेट्स (MCLR) में भी कटौती की है। यह 0.25 फीसदी कम हो गई है। यह कटौती सभी अवधि के लिए की गई है। एक महीने से एक साल तक की अवधि के लिए 0.25 फीसदी की कटौती की गई, जबकि रातभर की अवधि के लिए 0.15 फीसदी। एक साल के लिए बैंक का एमसीएलआर अब 7.95 फीसदी सालाना हो गया है।

बैंक ऑफ बड़ौदा ने भी दिया लाभ
बैंक ऑफ बड़ौदा ने खुदरा, निजी और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम (एमएसएमई) उद्योग ऋण के लिए ब्याज दर में 0.75 फीसदी की कटौती की है। इसके बाद यह ऋण ब्याज दर 7.25 फीसदी तक आ गई है, जो 28 मार्च से मान्य हैं। बैंक ने एक बयान में कहा कि उसने अपनी रेपो दर से जुड़ी ऋण ब्याज दर (आरएलएलआर) को 0.75 फीसदी घटा दिया है। बैंक ने कहा कि सभी तरह के खुदरा और निजी ऋणों पर 28 मार्च 2020 से 7.25 फीसदी का ब्याज दर लिया जाएगा।  

रेपो रेट में 15 साल में सबसे बड़ी कटौती
रिजर्व बैंक ने शुक्रवार को घोषित 7वीं द्विमासिक मौद्रिक नीति समीक्षा में नीतिगत दर रेपो में 0.75 फीसदी की कटौती कर दी थी। यह पिछले 15 साल में सबसे बड़ी कटौती बताई जा रही है। इसे 5.15 फीसदी से घटाकर 4.40 फीसदी कर दिया गया है। वहीं केन्द्रीय बैंक ने कोरोना वायरस को रोकने के लिए 21 दिन के लॉकडाउन (बंद) को देखते हुए लोगों की आय और आर्थिक गतिविधियों पर पड़ने वाले प्रभाव को देखते हुए कर्ज की किस्त के भुगतान पर भी तीन माह तक रोक लगाने की बैंकों और वित्तीय संस्थानों को अनुमति दी है।

एसबीआई ने ग्राहकों को दिया रेपो दर में कटौती का पूरा लाभ
आरबीआई द्वारा रेपो रेट में कटौती के बाद सबसे पहले एसबीआई एक वक्तव्य में कहा है कि उसकी नई घटी दर बाहरी मानक दर से जुड़ी कर्ज दर (ईबीआर) और रेपो दर से जुड़ी कर्ज दर (आरएलएलआर) के तहत कर्ज लेने वाले ग्राहकों पर लागू होगी। नई ब्याज दर एक अप्रैल 2020 से प्रभावी होगी। एसबीआई ने बाहरी मानक दर से जुड़ी कर्ज दर को 7.80 फीसदी से घटाकर 7.05 फीसदी वार्षिक कर दिया, जबकि आरएलएलआर को 7.40 फीसदी से घटाकर 6.65 फीसदी किया।
on March 31, 2020 No comments:
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Monday, 30 March 2020

कई परीक्षाओं के लिये मिलेंगे मौके

यूजीसी नेट सहित प्रवेश परीक्षाओं में आवेदन के लिए छात्रों को मिलेंगे और मौके 


कोरोना सकंट के चलते लॉकडाउन में फंसे छात्रों के अनुरोध को देखते हुए सभी प्रवेश और स्कॉलरशिप परीक्षाओं के आवेदन की अंतिम तिथि को एक महीने तक के लिए आगे बढा दिया गया है। इसके तहत अब छात्रों को 30 अप्रैल या उससे भी आगे तक आवेदन करने का समय मिलेगा। मानव संसाधन विकास मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) के महानिदेशक (डीजी) को इसे लेकर तुंरत प्रभावी कदम उठाने के लिए निर्देश दिए थे। जिसके बाद एनटीए ने यह फैसला लिया है।

इससे पहले भी मंत्रालय ने छात्रों और अभिभावकों के आने-जाने की परेशानी को समझते हुए नीट और जेईई मेंस जैसी परीक्षाओं को भी मई के अंतिम सप्ताह तक के लिए स्थगित करने के निर्देश दिए थे। मावन संसाधन विकास मंत्री के निर्देश पर फिलहाल जिन परीक्षाओं के आवेदन की अंतिम तारीख को एक महीने तक के लिए आगे बढाया गया है, उनमें इंडियन काउंसिंल आफ एग्रीकल्चर रिसर्च, जेएनयू प्रवेश परीक्षा, यूजीसी नेट, सीएसआईआर नेट, एनसीएचएम ( नेशनल काउंसिंल आफ होटल मैनेजमेंट), जेईई, इंदिरा गांधी मुक्त विश्र्वविद्यालय की पीएचडी परीक्षा, मैनेजमेंट प्रवेश परीक्षा और आल इंडिया आयुष पीजी प्रवेश परीक्षा आदि शामिल है।

https://ak2907.blogspot.com/2020/03/ak2907blogspotcom.html?spref=tw…

खास बात यह है कि इनमें से कई परीक्षाओं के आवेदन की अंतिम तारीख कल यानि 31 मार्च को खत्म होने वाली थी। मंत्रालय ने यह फैसला छात्रों की ओर से पिछले कुछ दिनों से किए जा रहे अनुरोध को देखते हुए लिया गया है। जिसमें छात्रों की ओर से लॉकडाउन के चलते समय पर आवेदन नहीं करने की जानकारी दी गई थी। साथ ही कहा गया था कि यदि आवदेन की अंतिम तारीख नहीं बढ़ाई जाती है, तो उनका साल खराब हो जाएगा।


बता दे कि इनमें से कई परीक्षाएं ऐसी है, जिसके लिए छात्र पूरे साल भर इंतजार करते है। ऐसे में यदि उन्हें यह मौका न मिलता, तो यह उनके तनाव का एक बड़ा कारण भी बन सकता था। मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने इससे पहले देश भर के सभी केंद्रीय और राज्य विश्र्वविद्यालयों से भी अपनी प्रवेश परीक्षाओं को कोरोना संकट के चलते कुछ समय के लिए आगे बढ़ाने का निर्देश दिया गया था।


on March 30, 2020 No comments:
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LAWS OF BLOGGING

must see

5 immutable laws of blogging.

Before I jump into the various ways you can actually monetize your blog or you've had it for some time now, I wanted to cover the five immutable laws of blogging. If you pay attention to these laws, you'll succeed over time. Ignore them, and you'll find it nearly impossible to drive any respectable amount of traffic and ultimately monetize your blog. 

1. Focus

Blogs need focus. You need to have a specific industry, niche or topic that you write about repeatedly. Try not to go all over the map. You'll find that veering off on tangents will make you lose your core audience. People want to visit a blog -- and keep revisiting it -- because it fills a need or a void. That happens by staying focused and on-topic. 

2. Quality

People think that blogging is about pushing out an enormous amount of content. But it doesn't work if it's thin content. Your content needs to be quality content. It needs to be thorough, well-written and cite its sources. If a study is referenced, it needs to be linked to. Don't skimp on quality if you're serious about monetizing your blog. 

3. Value

Your blog needs to deliver value. What can you teach other people about? What are you an expert at? Take the time to deliver value. Create thorough tutorials and informative posts that interweave things like videos and other media to truly help people understand or figure something out. Value is a precursor to income in any industry, but especially in blogging. 

4. Engagement

How engaging is your content? Does your blog incite people to spend a lot of time reading articles, watching videos or messaging on a forum, for example? The more people engage with your content, the more likely they'll be to purchase something from you. Without engagement, there's very little chance of monetization. 

5. Authority

How much authority do you have? How well-known are you in your field? The more authority you have, the more likely you can monetize your blog quickly. For example, if you have a large social media following and you decide to launch a blog, you can drive traffic quickly. If you're an expert at something else or a best-selling author, for example, you already have authority, all you need to do is leverage it. ak2907.blogspot.com

on March 30, 2020 No comments:
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Sunday, 29 March 2020

धरती कहे पुकार के!! सुधरने का वक़्त

पढें आज कोरोना महामारी से पूरी दुनिया खौफ के साये में,चारदीवारी में कैद सबकुछ ठीक होने की  कामना कर रही है!

मानव गतिविधी बन्द होने से पर्यावरण में निश्चित सुधार हुआ है 
हवा साफ और प्रदूषण मुक्त है ।

कोरोना के पहले भी पर्यावरण को लेकर सावधानी बरतने की जरूरत थी,और अब तो साफ है,मानव जाति ने सुधार नहीं किया तो,प्रकृति का कोप झेलने को मजबूर होना होगा ।

कोरोना से साफ है, विज्ञान की शक्तियों के बावजूद,मानव प्रकृति शक्ति के सामने बेबस है,
प्रकृति जब हमारे ही कार्यों का परिणाम हमें देती है तो रहम नहीं करती 
वाजिब है,मानवता की हद पार करने के बाद ही प्रकृति सबक देती है ।ये भी जानें
on March 29, 2020 No comments:
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qurantine के boredom के समय बनाएं कुछ स्वादिस्ट और सरल

मूँग दाल की पकौड़ी


एक अदरक का टुकड़ ,एक मूली,2 प्याज,2 हरी मिर्च,आधा चम्मच हल्दी,आधा चम्मच गरम मसाला,एकचुटकी नमक

सारी सामग्री कद्दूकस से सामान्य रूप से घिस ले 
फिर इसमे 100 ग्राम भीगी हुई मूँग की दाल बिना पीसे उपरोक्त कद्दूकस सामग्री में मिला दे ।

अब इसमे लोगों की संख्या के आधार पर बेसन मिला कर,थोड़ा सा पानी मिला कर तैयार कर लें,पानी जादा न हो ।

कड़ाही में घी गर्म होने के बाद उपरोक्त मिश्रण से हाथ से घी में डालते जाये जैसे साधरण पकौड़ी में डालते हैं ।

बस टमाटर की चटनी के साथ परोसें ।इसे भी देखें!!
on March 29, 2020 2 comments:
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लॉकडाउन: EPF योजना में हुआ संशोधन, खाते से निकाल सकते हैं तीन माह का वेतन


लॉकडाउन: EPF योजना में हुआ संशोधन, खाते से निकाल सकते हैं तीन माह का वेतन

एजेंसी,नई दिल्लीLast Modified: Sun, Mar 29 2020. 15:19 IST
  
epfo scheme

भारत सरकार ने कर्मचारी भविष्य निधि योजना में संशोधन के लिए अधिसूचना जारी कर दी है जिससे लॉकडाउन के दौरान आर्थिक तंगी का सामना कर रहे कर्मचारी तीन महीने का वेतन निकाल सकेंगे। 

श्रम एवं रोजगार मंत्रालय ने रविवार को बताया कि कोरोना वायरस 'कोविड-19' के मद्देनजर कर्मचारी भविष्य निधि योजना 1952 में संशोधन के लिए अधिसूचना जारी कर दी गईहै। अब योजना में शामिल कर्मचारी अपने तीन महीने के मूल वेतन और महंगाई भत्ते के बराबर की राशि निकाल सकेंगे। यह रकम उन्हें वापस जमा नहीं करानी होगी। हालांकि यह राशि योजना में जमा उनकी कुल राशि के 75 प्रतिशत से अधिक नहीं होने की शर्त भी है। 


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