मोबाइल टावर के दुष्परिणाम (Mobile Tower Radiation Side Effects)
- मनुष्य के दिमाग में असर करता है – रिपोर्ट के अनुसार जो लोग मोबाइल टावर के आसपास रहते है, उसके संपर्क में अधिक आते है, उन्हें सर दर्द, ट्यूमर, माइग्रेन की समस्या अधिक होती है. कुछ लोगों को भूलने की बीमारी, याददाश्त खो जाना जैसी समस्या ये भी गुजरना पड़ता है.
- कैंसर – कुछ लोगों का मानना है कि मोबाइल टावर मानव शरीर में कैंसर के सेल्स बनाने में भी मदद करते है, लेकिन इस पर अभी जांच पड़ताल चल रही है. ये कितना सही है, कितना गलत अभी नहीं कहा जा सकता.
- बच्चों पर बुरा असर – मोबाइल टावर विकिरण का बच्चों पर भी बहुत बुरा असर होता है. आँखों में जलन, आँखों से पानी आना, सर दर्द, चिड़चिड़ाहट आदि समस्याएं सामने आती है. बच्चों का इन विकिरण के पास अधिक खतरनाक है, क्यूंकि आगे चलकर ये समस्याएं उनके लिए अधिक मुसीबत बन जाएँगी. बच्चों में ध्यान केंद्रित करने में भी समस्या होती है, जिससे उनकी पढाई पर असर पड़ता है.
- जीव जंतु पर असर – मोबाइल टावर मनुष्यों के साथ-साथ पशु पक्षी के लिए भी बहुत खतरनाक है. पक्षी इन मोबाइल टावर से निकलने वाली विकिरण से दूर रहते है, क्यूंकि वो जब इसके संपर्क में आते है, उनकी मृत्यु हो जाती है. आजकल हमारे घर के आस-पास नाम मात्र को चिड़िया या कोई भी अन्य पक्षी देखने को मिलते है, हम खुद ही इस बात के गवाह है. शहरों के बीच में ये मोबाइल टावर खड़े हो रहे है, जिससे पक्षी शहरों में अपना बसेरा छोड़ चुके है, वो ऐसे हिस्सों में रहना पसंद करते है, जहाँ मोबाइल विकिरण न हो. मधुमक्खियों में इसका असर बहुत गहरा दिख रहा है, उनके अंदर प्रजनन की समस्या भी हो रही है.
- पेड़ों के लिए नुकसान – कुछ अध्ययन में पाया गया है कि मोबाइल टावर रेडिएशन पेड़ों के लिए भी अच्छी नहीं है. मोबाइल टावर एंटीना के सीधे संपर्क में आने से पेड़ों के ऊपरी हस्से सुख जाते है. उनका विकास उतनी गति से नहीं होता, जितना होना चाहिए.
- गर्भवती महिलाओं पर बुरा असर : इसके विद्युतीय विकिरण का प्रभाव गर्भ पर भी बुरा पड़ता हैं, जिससे भ्रूण कमजोर हो सकता हैं और गर्भपात भी हो सकता हैं.
- अन्य समस्या – मनुष्यों में इसकी वजह से अनिंद्रा (नींद न आने की बीमारी), तनाव, चिड़चिड़ाहट होना, पाचन में समस्या, धड़कन बढ़ना, बहरापन, बाँझपन आदि.
सरकार का इस विषय पर कहना है कि मोबाइल टावर से मनुष्य को कोई नुकसान नहीं है. इसकी जांच चल रही है, इसलिए किसी भी टिपण्णी पर हामी भरना गलत होगा. दरअसल ग्वालियर के एक आदमी ने अपने घर के पास लगे टावर को हटाने के लिए याचिका दर्ज की है, उनका कहना है कि टावर की वजह से ही उन्हें कैंसर हो गया है. इस पर दूरसंचार मंत्री ने बैठक की और जाँच के आदेश दिए है.संचार मंत्री का कहना है कि विश्व स्वास्थ्य संगठन और अन्य संसथान में शोध हुए है, जिसके परिणाम के अनुसार मानव शरीर में मोबाइल टावर रेडिएशन का कोई असर नहीं होता है. लेकिन इस पर अभी विश्व स्तर पर और गहरी जांच हो रही है.
मोबाइल टावर रेडिएशन की ऑनलाइन जाँच (How can I check my mobile radiation level?)
सरकार ने इस समस्या का एक हल भी निकाला है. कई कंपनी सरकार के नियमों का उलंघन करते हुए, इन टावर्स को गलत जगह खड़ा कर देते है. मोबाइल टावर से इलेक्ट्रोमेग्नेटिक रेडिएशन निकलती है, जिसे इएम्ऍफ़ एमिशन (EMF Emissions) कहते है. इसकी शिकायत के लिए के पोर्टल बनाया गया है. आप अपने घर के पास बने मोबाइल टावर की शिकायत ऑनलाइन पोर्टल के द्वारा कर सकते है, आप इस पोर्टल के द्वारा यह भी चेक करवा सकते है कि आपके करीब का मोबाइल टावर सुरक्षित है की नहीं.
दूरसंचार विभाग एवं संचार मंत्रालय ने तरंग संचार नाम का एक पोर्टल लांच किया है, जिसमें जाकर आप मोबाइल टावर सम्बन्धी शिकायत कर सकते है. बहुत से अध्ययन के बाद भी सभी के अंदर इसको लेकर भ्रम बना हुआ है, इसीलिए सरकार इस पोर्टल के द्वारा सही जानकारी पहुंचाएगी. लोगों में जो भी गलत अवधारणा प्रचलित है, उसे इस पोर्टल के द्वारा विराम मिलेगा.
कैसे करें तरंग पोर्टल में शिकायत (Tarang Online Portal)
- सबसे पहले तरंग संचार ऑनलाइन पोर्टल खोलें. यहाँ अपने एरिया, जहाँ आप रहते है, उसे डालें.
- आप जीपीएस सिस्टम ऑन करके अपने एरिया की जानकारी आटोमेटिक भी दे सकते है. इसके बाद इएम्एफ ओवरव्यू (EMF Overview) पर क्लिक करें. यहाँ अपनी पर्सनल जानकारी भरें और सबमिट करें, आपकी मेल आईडी पर ओटीपी आएगा, जिसे भरने के बाद आपके शहर के सारे टावर आपको स्क्रीन पर दिखाई देंगें.
- किसी एक टावर पर क्लिक कर के आप ये पता कर सकते है, कि यह सरकारी नियमों के अनुसार लगा है या नहीं और सुरक्षित है या नहीं.
- इसके अलावा अगर आप ईएमएफ एमिशन (EMF Emissions) की और गहराई से सही जानकारी चाहते है तो 4000 रूपए देकर आप इसकी जांच करवा सकते है.
मोबाइल टावर सुरक्षित है या जानलेवा ये तो क्लियर नहीं है, लेकिन कई लोग जो इसके करीब रहते है, उन्हें महसूस हुआ है कि उन्हें बहुत सी समस्याएं इसकी वजह से ही हो रही है. आने वाले में दिनों शोध से और भी सही रिजल्ट सामने आ सकते है.
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