कोरोना वायरस से अब तक दुनियाभर में 4.56 लाख लोगों की मौत हो चुकी है। भारत में भी कोरोना के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। ऐसे में कोरोना से जूझ रही दुनिया के लिए एक दवा उम्मीद बनकर नजर आ रही है। यह डेक्सामेथासोन (dexamethasone) दवा है। भारत में इस दवा का इस्तेमाल करीब 60 सालों से हो रहा है। यह दवा भारत में 20 कंपनियां बनाती हैं। यह यहां से 107 देशों में निर्यात की जाती है। इस दवा की 10 गोलियां सिर्फ 3 रुपए में आती हैं।
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NTA UGC NET PAPER 1 IMPORTANT QUESTIONS
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Friday, 19 June 2020
Wednesday, 3 June 2020
Kisan kahin aur kabhi bhi bech sakta h apni fasal
आखिरकार किसानों के लिए वो खबर आ ही कई जिसका वे बरसों से इंतजार कर रहे थे. केंद्र सरकार ने किसानों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए उन्हें मजबूती प्रदान करने वाले प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है. केंद्र सरकार ने मंडियों और इंस्पेक्टर राज को हटाने वाले कानून को लागू कर दिया है. अब देश का किसान भी अमीर बनेगा. उसे अपने अनाज को कहीं भी बेचने की आजादी होगी.
'वन नेशन, वन एग्री मार्केट' कानून को मिली मंजूरी
किसानों के लिए 'वन नेशन, वन एग्री मार्केट' (One Nation – One Agri Market) का मार्ग प्रशस्त करते हुए केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बुधवार को अधिसूचित एपीएमसी मंडियों के बाहर बाधा मुक्त व्यापार की अनुमति देने वाले अध्यादेश को मंजूरी दे दी. बताते चलें कि कृषि उत्पादन व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन और सुविधा) अध्यादेश, 2020 (The Farming Produce Trade and Commerce (Promotion and Facilitation) Ordinance), राज्य सरकारों को मंडियों के बाहर किए गए कृषि उपज की बिक्री और खरीद पर कर लगाने से रोकता है और किसानों को लाभकारी मूल्य पर अपनी उपज बेचने की स्वतंत्रता देता है.
मंत्रिमंडल के फैसले की घोषणा करते हुए, कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा, 'मौजूदा एपीएमसी मंडियां काम करना जारी रखेंगी. राज्य एपीएमसी कानून बना रहेगा. लेकिन मंडियों के बाहर, अध्यादेश लागू होगा.' उन्होंने कहा कि अध्यादेश मूल रूप से एपीएमसी मार्केट यार्ड के बाहर अतिरिक्त व्यापारिक अवसर पैदा करने के लिए है ताकि अतिरिक्त प्रतिस्पर्धा के कारण किसानों को लाभकारी मूल्य मिल सके.
उन्होंने कहा कि पैन कार्ड वाले किसी भी किसान से लेकर कंपनियां, प्रोसेसर और एफपीओ अधिसूचित मंडियों के परिसर के बाहर बेच सकते हैं. खरीदारों को तुरंत या तीन दिनों के भीतर किसानों को भुगतान करना होगा और माल की डिलीवरी के बाद एक रसीद प्रदान करनी होगी. उन्होंने कहा कि मंडियों के बाहर व्यापार करने के लिए कोई 'इंस्पेक्टर राज' नहीं होगा. मंत्री ने कहा कि मंडियों के बाहर बाधा रहित व्यापार करने में कोई कानूनी बाधा नहीं आएगी.
बताते चलें कि मौजूदा समय में, किसानों को पूरे देश में फैली 6,900 एपीएमसी (कृषि उपज विपणन समितियों) मंडियों में अपनी कृषि उपज बेचने की अनुमति है. मंडियों के बाहर कृषि उपज बेचने में किसानों के लिए प्रतिबंध हैं
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